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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

प्रबोध कुमार गोविल के उपन्यास "अकाब" के अंग्रेजी व सिंधी अनुवाद का लोकार्पण

प्रबोध कुमार गोविल ने कहा कि उनके बहुचर्चित उपन्यास "अकाब" का अंग्रेज़ी अनुवाद पाठकों को केवल एक वाक्य के कारण उपलब्ध हो सका है, चित्रेश रिझवानी ने उनका उपन्यास हिंदी में पढ़ कर उनसे कहा कि अंतरराष्ट्रीय कैनवस पर लिखा गया ये कथानक यदि अंग्रेज़ी में आता तो मज़ा आ जाता। ये सुनकर उन्होंने युवा पत्रकार चित्रेश से कहा- लाओ...और इसका अंग्रेज़ी अनुवाद शुरू हो गया। पुस्तक का सिंधी अनुवाद मुंबई की भाग्यता लच्छानी ने किया है जो एक सीए होते हुए भी साहित्य में दखल रखती हैं।

जयपुर में आज गोविल की इन तीनों किताबों का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज, नरेंद्र शर्मा "कुसुम", बाबू खांडा, मनोहर रावतानी और अखिल शुक्ला ने किया।

कार्यक्रम का संयोजन- संचालन गजेन्द्र रिझवानी ने किया।

इस अवसर पर प्रख्यात कहानीकार रत्न कुमार सांभरिया, रजनी मोरवाल, भागचंद गुर्जर, नीलिमा टिक्कू तथा कवि हरीश करमचंदानी, मंजु महिमा भटनागर, श्याम माथुर सहित नगर के अनेक गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।

डॉ नरेंद्र शर्मा कुसुम ने कहा कि गोविल के उपन्यासों का कैनवस इतना गहन है कि ये गंभीरता से पढ़े जाने पर विषद अर्थ देता है। नन्द भारद्वाज ने कहा कि प्रबोध कुमार गोविल कई विधाओं में लिख रहे हैं और उन्हें अपनी बात समूची अर्थवत्ता से कह पाने में महारत हासिल है।

दिशा प्रकाशन, दिल्ली से हिंदी में प्रकाशित ये उपन्यास अंग्रेज़ी में अनु प्रकाशन,जयपुर तथा सिंधी में मुंबई से छपा है। पंजाबी में इसे पटियाला से प्रकाशित किया गया है जहां इसे हर्ष कुमार हर्ष ने अनूदित किया है।

उल्लेखनीय है कि प्रबोध कुमार गोविल का पिछला उपन्यास "जल तू जलाल तू" ग्यारह भाषाओं में अनूदित हो चुका है।

- हिमांशु जोनवाल,
बरकत नगर,
जयपुर।


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