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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

प्यार कर देखो

डॉ. रंजना वर्मा

जिंदगी में पीर से भी प्यार कर देखो । रूठ जाए मीत तो मनुहार कर देखो ।। लाख बाधाएँ मिलें तूफ़ान भी आये हौसले को हाथ की पतवार कर देखो ।। स्वप्न कितने ही सजाये धृष्ठ नयनों ने यत्न से ही स्वप्न सब साकार कर देखो ।। आँसुओं में डूब कर कब वक्त है गुज़रा आज दिल के दर्द को त्यौहार कर देखो ।। हो अगर सच्ची लगन होंगे सभी अपने हर किसी से प्रेम का व्यवहार कर देखो ।। हैं उठीं जो उँगलियाँ झुक जाएंगी खुद ही रोष को अपने तनिक तलवार कर देखो ।। शांति मन की ढूँढ़ने वन में नहीं जाना शत्रुता का प्रेम से प्रतिकार कर देखो ।।

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