मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

फैसला

राजीव कुमार

जगत को दुनियादारी का एहसास था लेकिन जमाने की परवाह नहीं थी। वह अपनी बेटी के लिए समाज से लड़ने को तैयार था। जगत ने पंच-परमेश्वर से कहा ’’ आपकी हर सजा को स्वीकार करता हूँ, लेकिन अपनी बेटी का हाथ गंजेरी, भंगेरी और जुआरी के हाथ में नहीं दे सकता। जगत ने अपने घर आकर अपनी पत्नी से बोला ’’ हम लोग अब इा गाँव में नहीं रहेंगे। खेत बेचकर चले जाएंगे। ’’

जगत की बेटी फुलवा ने पिताजी के दृढ फैसले पर गर्व किया लेकिन उनकी अनिच्छा, निराशा और बेबसी को ताड़ गई और पंच परमेश्वर के सामन गंजेरी, भंगेरी और जुआरी कल्ल्न का हाथ थाम लिया।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें