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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2019

रिश्ते रिश्ते होते हैं

वीरेन्द्र कौशल

रिश्ते रिश्ते होते हैं रिश्ते हमारे विचार मेरे भवनायें आपकी शब्द साँझे परिणाम आपके परिवार हमारे रिश्ते रिश्ते होते हैं कहते हैं की आज कल हर तरफ आर्थिक मंदी का दौर हैं अगर आप अपनें रिश्तों को भी मंडी में बेचनें के लिए आयोगे तो आर्थिक मंदी का दौर ही सबसे बेहतर विकल्प हैं रिश्ते रिश्ते होते हैं रिश्तों को रिसनें मत दें रिश्तों को तारों से जोड़ कर रखिये इन्हें तार तार मत होने दीजिये ये बड़े अनमोल हैं कीमती हैं रिश्तों में कभी भी शर्त नहीं होती गर शर्त हों तो फिर वो कभी रिश्ते नहीं होते रिश्ते रिश्ते होते हैं ..... रिश्ते रिश्ते होते हैं ....


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