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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

गांडीव

सुनील चौरसिया 'सावन'

हे अर्जुन! अब गांडीव तुम्हें उठाना होगा। दुश्मन को दम दिखाना होगा।। करोगे कब तक "मन की बात" सहोगे कब तक ये उत्पात श्वान शेर पर वार करे शेर श्वान से डरे, मरे? इस अन्धेरी रात में न्याय - सूर्य उगाना होगा। अब गांडीव तुम्हें उठाना होगा। दुश्मन को दम दिखाना होगा।। निशदिन तुम चाहते हो शान्ति अरि दल चाहे हर पल अशान्ति बुद्धिहीनों की मरी इन्सानियत 'सावन'! हो जाए फिर महाभारत सुनो! ईंट से ईंट बजाना होगा। अब गांडीव तुम्हें उठाना होगा। दुश्मन को दम दिखाना होगा।। चाहें जितना कर लो बातचीत नापाक शत्रु न होंगे तुम्हारे मीत हे अहिंसा के पुजारी कर लो युद्ध की तैयारी उन्हें रण क्षेत्र में धूल चटाना होगा अब गांडीव तुम्हें उठाना होगा। दुश्मन को दम दिखाना होगा।। हम हैं जीवन-पथ के राही ओजस्वी व तपस्वी सिपाही देश की ख़ातिर जीए मरेंगे विश्व का कल्याण करेंगे एकता का रंग दिखाना होगा अब गांडीव तुम्हें उठाना होगा। दुश्मन को दम दिखाना होगा।।


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