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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

कुछ करना चाहता हूँ

सौरभ कुमार ठाकुर

कुछ करना चाहता हूँ, पर कुछ कर नही पाता हूँ । आगे बढ़ना चाहता हूँ, पर आगे बढ़ नही पाता हूँ । कोई मदद करना चाहे, तो मदद ले नही पाता हूँ । किसी से मदद मांगना चाहता हूँ, पर शरमा जाता हूँ । अच्छे जगहों पर घूमना चाहता हूँ, पर जेब खाली पाता हूँ । बड़े लोगो को देखता हूँ, तो अपने नसीब को कोषता हूँ । अच्छा-अच्छा भोजन चाहता हूँ, पर कभी-कभी भूखे पेट ही सो जाता हूँ । बड़े-बड़े अमीरों को देखकर, मैं भी अमीर कहलाना चाहता हूँ । पर अपने आर्थिक परेशानियों के कारण, मैं सिर्फ गरीब कहलाता हूँ ।


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