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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

इम्तिहान

सपना परिहार

इम्तिहानों का दौर जारी है, थोड़ा सब्र रखिये, हालात कैसे भी हो , थोड़ा धैर्य रखिये। बुरा वक्त है, ये भी गुजर जाएगा उम्मीद का सूरज भी एक दिन निकल ही आएगा। इस तरह से तू मायूस न हो , इन परेशानियों से यूँ दुखी न हो, जिसने ग़म दिया, वो खुशी भी देगा, उस खुदा के दर पे तू यूँ मायूस न हो । वो उसके ही सब्र का इम्तिहान लेता है, जिसके हौसलों में जान होती है, ये और बात है कि उनकी जिंदगी आसान नही होती है। हिम्मत रख ,उस रब पे भरोसा कर, उसके हर इम्तिहान में तू खरा उतरेगा, कभी न कभी तो ये ग़म का बादल छटेगा।


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