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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

वो मांग रही इंसाफ

रोली मिश्रा

अत्याचार से पीड़ित होकर झुलस गई वो आग में चीख रही वो अपने दर्द से चीक रही वो इंसाफ में मौत को मात देकर करना चाहती थी अपराधियों का पर्दाफाश मांग रही देखो हर लड़की उसके लिए इंसाफ 1 किलोमीटर दौड़ कर मदद को उसकी कोई न आया उस लड़की को आग में देखकर लोगों ने उसको दूर भगाया अत्याचार से पीड़ित होकर अपराधी उसको छोड़ गए कर दिया उसको आग हवाले शरीर उसका नोच गए दे रहा देश उनकी पीड़िताओं का साथ क्योंकि बेटियां मांग रही हैं इंसाफ उनके भी कुछ सपने होंगे उनके भी तो कोई अपने होंगे करना चाहती नारी उन दरिंदों का पर्दाफाश हो रहा सरकार को क्यूं कानून बनाने से एतराज जबकि हर बेटी मांग रही इंसाफ ।।।


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