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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

फिर से क्यों यूँ तड़पाया है?

राजीव डोगरा

बड़ी मुद्दत के बाद मैंने किसी को अपना बनाया है। मेरे खुदा! मत छीन उसको मेरी दिल की धड़कनों से। बड़ी मुश्किल से रिश्तों में डालकर उसको अपनाया है। राख तो हो ही जाना है एक दिन मिट्टी में मिल कर मैंने। फिर क्यों? एक शख्स के लिए इतना तड़पाया है। अब क्या ऐब बचा है मुझ में? मेरे खुदा! जो एक ज़रा नफरत का बरसों बाद फिर से मेरे पास यूं आया है। ऐ खुदा! तुझे तेरी खुदाई का वास्ता मेरे महबूब की जुदाई का वास्ता। यूँ न तड़पा फिर से बड़ी मुश्किल से किसी को दिल से अपना बनाया है।


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