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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

तीन कविताएँ

पवनेश ठकुराठी 'पवन'

1. नव वर्ष में राम जी
नव वर्ष में राम जी हो ऐसा कमाल धरती पर बिछ जाये खुशियों का रूमाल। हो ना कोई भेदभाव बस फैले भाईचारा चमके हर इंसान के किस्मत का सितारा।
2. किनारे आ गये
जिनको देखा था ख्वाब में कभी वो सामने हमारे आ गये। रब से मांगे थे दो फूल हजारी के मगर झोली में सितारे आ गये। रंगीनियाँ कभी हमने न चाही थीं किस्मत के दहले से नजारे आ गये। हम तलाशते थे खिलौने शीशे के मगर हाथ में गुब्बारे आ गये। कहता है पवन बार-बार साथियों जो सच की राह पर चले वो तूफां से लड़के भी किनारे आ गये।
3. तुमसे है कहना
तुमसे है कहना मिलजुलकर रहना ना रखना किसी से बैर करना दोस्ती की सैर नफरत का डिब्बा फोड़ देना असमानता की दीवारें तोड़ देना दिखाना धूप परम ब्रह्म की रखना भावना वसुधैव कुटुम्बकम् की।

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