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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

आँसू

डॉ॰ मोहन सिंह यादव

आँसू की नहीं जवानी होती है , और नहीं बुढ़ापा होती है , सिर्फ उम्र का अन्तर है , कुछ खुशी के आँसू बहते हैं , कुछ गमों से बोझिल होते हैं , बचपन के आँसू हुए एक , युवा के आँसू हुए अनेक , वृद्धों के हैं , बहुल – विशेष | आँसू में आग होती है , आँसू में प्यास होती है , आँसू से सृष्टि होती है , आँसू से वृष्टि होती है , आँसू का चक्र अनोखा है , देता मानव को धोखा है | मन ‘ मोहन ’ क्यों भटकता है ? जीवन - आँसू की घनता है |


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