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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

विद्वान कौन?

डॉ० कोयल विश्वास

मंचों पर बड़े-बड़े व्याख्यानों से, प्लावित है ज्ञान भण्डार मूल्यों के पुनर्मूल्यांकन के विवादों से विस्मित हो रहा है प्रबुद्धों का संसार। बुद्धिजीवी एवं दिग्गजों के विचारों पर हो रहे है पुनर्विचार, पूर्वसम्मत मतों पर अब पुनः हो रहे चर्चे विस्तार। स्वरचित लेखों पर समीक्षकों के मतों का प्रहर, एक ही विषय पर अनेकों का हस्तक्षेप, यही तो है वर्तमान संसार। मन में प्रश्न उठता है अव, तो वास्तव में विद्वान कौन? वे जो नये विचार के प्रतिष्ठाता है, या वे जो इनपर टीका टिप्पणी करते हैं? क्या वे विद्वान है जिनके कोश में है शब्दों के भण्डार? या वे जो सुनाते है दहाड़ते हुए विचार, टुकड़ों में, (दिग्गजों से) ले उधार? विद्वानों के प्रतिस्पर्धा में, मैं केवल मूक दर्शक हूँ। ज्ञान के भार से द्रवित जो इन्सान सदा शान्त रहते है, मैं विद्वान उन्हीं को मानती हूँ।


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