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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

आज़ादी

गौरव श्रीवास्तव

घुट-घुट कर मरने से अच्छा, तुम्हे खुशी से जीने की आजादी दी है, तुम्हे मुझसे दूर जाना था, तुम्हे चैन से सोने की आजादी दी है, आज मैने तुम्हे आजादी दी है। माफ़ करना मैने थोड़ी देर कर दी है, तुम्हारे मन को समझने में भूल कर दी है, सोचा मुझे भी प्यार मिलेगा, शायद मैने आस गलत कर दी है, आज मैने तुम्हे आजादी दी है। सारी गलतफहमियां अब तोड़ दी है, अपनी गलतियों में एक कड़ी और जोड़ दी है, खैर मुबारक हो, तुम्हारी गलतियां मैने ओढ़ दी है, आज मैने तुम्हे आजादी दी है। ख्याल रखना तुम्हे अपनी मोहब्बत दी है, और अब मैने तुम्हारी लत छोड़ दी है, गुस्सा थोड़ा कम करना, क्यों की सारे वजह मैने अपनी तरफ मोड़ दी है, आज मैने तुम्हे आजादी दी है।


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