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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

दर्द भरी यादें

गरिमा

कुछ सूखे पत्ते किताबों में मिले, तेरी याद दिला गए। मेरे दिल की गहराइयों से पूछो, कितना याद आते हो तुम, अब तेरे बिन रहा जाता नहीं। तुम से हम कितना प्यार करते हैं हर साँस में तुम बसे हो, पास मेरे तुम थे, लगता था सब कुछ है मेरे पास, जल्दी से आ जाओ तुम, मेरी हर धड़कन बुलाती है। चाँद को जब देखती हूँ तो तुम्हारी याद आती है। हमें बहुत तड़पाती है, ख्वाबों में भी तुम आते हो। मेरी नींद उड़ाते हो, तुम्हारी यादो में के सिवा कुछ याद नहीं अब, आ जाओ तुम वापस, मेरी हर हर साँस बुलाती है , तेरी याद बहुत दर्द जगाती है।।


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