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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

भक्त कनकदास

अंबूजा एन मलखेडकर ' सुवना '

कनकदान कर बचपन में ही नाम कनक था कहलाया सपनों में आकर केशव ने कनक को अपना दास बनाया मोह माया धन सबकुछ त्यागा पहनके धोती और कंबल इकतारा ले हरिनाम भजने को घर से गये निकल गुरुतलाश में घूम घूम कर व्यासराय को गुरु बनाया अहम त्याग ही मोक्षमार्ग है ये भक्तों को बतलाया कनक भक्ति से खुश हो श्रीहरि ने खिड़की से दरस दिया ऊंच नीच का भेद मिटाकर सतगुण का सम्मान किया कुल जाति से ऊपर है मानव घर घर संदेश दिया कनक पदों को गाकर सबने अंधकार को दूर किया आज गए जाते हैं घर घर कनकदास के वही भजन भक्त बनाते हैं ये पद सुन अपना जीवन सफल सुमन

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