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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

भक्तिन महादेवी

अंबूजा एन मलखेडकर ' सुवना '

मात पिता की इकलौती पुत्री थी भक्तिन महादेवी सुंदर और शुशील गुणी तरुणी थी भक्तिन महादेवी पति रूप में मल्लिकार्जुन को इष्टदेव जिसने माना दीवानी की निष्ठा और भक्ति ने रब को पहचाना इच्छा के विपरीत हुआ कौशल राजा से गठबंधन पति को बाधा मान भक्ति में त्याग दिया गृहस्थी जीवन हुई दिगम्बर तन और मन से केश राशि को वस्त्र बना ओढ़ लिया वैराग्य देवी ने परम पुरुष को हृदय बिठा अज्ञानी को दिखा आईना मधुर काव्य वाणी बोली सदाचार सदगति ज्ञान स्नेह तन मन में शुद्धि घोली शरण समूह की ध्रुवतारा मीरा जैसा संदेश दिया नारी कुल की बनी प्रेरणा तन मन अर्पित वेश किया

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