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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

दास श्रेष्ठ पुरंदर दास

अंबूजा एन मलखेडकर ' सुवना '

श्रीनिवास नायक था जिनका नाम पुरन्दरगढ़ वासी महल दुमहले धन अपार संपत्ति थी अच्छी खासी था नास्तिक कंजूस ,नहीं थी दान धर्म श्रद्धा भक्ति लेकिन पत्नी की श्रद्धा भक्ति में थी अद्भुत शक्ति एक दिवस विश्वास भरी आंखों में हरि दर्शन देखा पल भर में तज धन संपत्ति बदली किस्मत की रेखा व्यवसाय की दीक्षा लेकर पहुच गए भगवन के पास कन्नड़ संस्कृत ज्ञानवान बन हो गया नाम पुरंदर दास कर्नाटक के भजन गीत संगीत पितामह कहलाये भाव राग लय नैतिकता मानवता के संदेश सुनाए पुरंदर विट्ठल नाम अमर है गाते भजन यही जन जन दासों में हैं श्रेष्ठ दास और श्रेष्ठ पुरंदर दास भजन

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