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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

आज ये दिल कहता है

अल्पा मेहता

इस हसीं रात का मौसम सुबह तक ठहरता है.. इस हसीं ऋत मे तुम निखर जाओ.. आज ये दिल कहता है.. अब हसीं आलम मदहोशी का छा रहा है.. इस आलम मे तुम भी मदहोश बन जाओ.. आज ये दिल कहता है.. दिल के समन्दर मे तूफान मचल रहा है.. इस दिल के भॅवर मे तुम भी डूब जाओ.. आज ये दिल कहता है.. ये खुला आसमान आज जमीं पर उतर रहा है.. इस जमीं पर तुम चाँद बनके चाँदनी फैलाओ.. आज ये दिल कहता है.. मोहलत है इस दिल को बस पल दो पल की.. इस एक एक पल को उमर मे तबदील कर दो.. आज ये दिल कहता है..


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