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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

कानून

डॉ. रमेश यादव

टीवी पर खबर आ रही थी – ‘नॅशनल पार्टी का एक नेता पिछले बीस वर्षों से पार्टी के ही एक क्षेत्रीय महिला अध्यक्ष से रेप कर रहा था, उसकी उम्र साठ वर्ष की है । महिला की उम्र पैंतालीस वर्ष है उसने शादी नहीं की है। नेता ने उससे शादी करने का वादा किया था, पर वह अपने वादे से अब मुकर गया है, इसलिए महिला ने क्षेत्र के पुलिस थाने में उस नेता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस उस नेता को अरेस्ट करना चाहती है, पर नेता लापता है। हमारे करसपॉडेंट ने भी उस नेता से संपर्क करने की कोशिश की मगर, उसका मोबाईल स्वीच ऑफ़ बता रहा है, और घरवाले इस मसले पर बात नहीं करना चाहते।‘

न्यूज को सनसनी बनाते हुए लगातार उस नेता का फोटो, उसके दफ्तर के बाहर लगे नेम प्लेट को उसके भाषणों की क्लिपिंग, घरवालों की स्थिति इत्यादि दिखाई जा रही थी। नेता की पत्नी रो–रोकर गश खा रही थी और उसकी विवाहित बेटी मां को सांत्वन दे रही थी। पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता से प्रतिक्रियाएं ली जा रही थी। ‘अमुख–अमुख धारा के अंतर्गत पुलिस कस्ट्डी और जेल का प्रावधान इत्यादि की चर्चा टीवी पर जोर-शोर से हो रही थी। महिला मोर्चा की ओर से रेपिस्ट को कठोर सजा देने की बात कही जा रही थी।‘

टीवी पर यह खबर देखकर पड़ोस का जॉनी लोबो भागता हुआ मेरे घर आया और बोला, ‘’ यार, वह महिला कौन है, उसे क्यों नहीं टीवी पर दिखाया जा रहा है ? उसकी फोटो भी नहीं दिखाई जा रही है। अर्थात औरत की आबरू को बचाया जा रहा है, और मर्द की आबरू को सरेआम उछाला जा रहा है। अब जिस महिला के साथ कांड हुआ उसे कुछ समय के लिए छोड़ भी दें, तो भी जिस नेता पर आरोप लगाया गया है, उसकी पत्नी और बेटी की तस्वीरें लगातार दिखाई जा रही हैं ! ये महिला नहीं है क्या ? इनकी इज़्ज़त, आबरू नहीं है क्या ? इन्हें समाज में नहीं रहना क्या ? ये कौन सा न्याय है? एक महिला जो अफेयर के इतने सालों के बाद भी अब रेप का आरोप लगा रही है, उसका चेहरा छिपाया जा रहा है ? और उस पत्नी और बेटी के बारे में नहीं सोचा जा रहा है जो बेकसूर हैं, उनकी इज्जत की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। टीवी पर बार–बार उनकी स्थिति की जानकारी दी जा रही है ,तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, क्या इस मैटर में उनकी इज्जत नहीं उछाली जा रही है ? सच क्या है और झूठ क्या है, यह तो जांच के बाद सामने आयेगा, मगर मीडियावाले तो अभी से ही उस नेता की इज्जत लूट रहे हैं।“

तब तक पीछे से लोबो की पत्नी भी मेरे घर में हाजिर हो गई और चर्चा में शामिल होते हुए बोली,

“ भाई साहब ये लोबो भी एक पॉलिटिकल पार्टी का नेता है ना, तो इसका भी बाहर कुछ लफड़ा होएंगा, इसीलिए उस नेता की बाजू ले रहा है, सारे मर्द एक जैसे होते हैं ? लोबो कल से पार्टी का काम बंद करके कोई नया काम धंधा करो, हमको लफड़ा नहीं चाहिए। हमारे घर में भी एक जवान बेटी है।

लोबो का पसीना छूट गया। उसने अपनी पत्नी को समझाया कि ‘सब नेता एक जैसे नहीं होते। सच- झूठ तो अभी सामने नहीं आया है ना ! ये तो एकतरफा आरोप है। अभी उस नेता का बयान आना बाकी है। आखिर उसका भी अपना पक्ष होंगा ना बाबा, तू क्यों इतने जल्दी अपना जजमेंट देती है, इसके लिए कानून है ना बाबा ! मैं इतने सालों से पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता हूँ। इस तरह अचानक राजनीति को कैसे छोड़ सकता हूँ ? और तुम्हारी खुद की इच्छा है कि मैं कोई बड़ा आदमी बनूँ, तो एक दिन मैं भी विधायक बन जाऊंगा, उसके बाद सांसद और फिर मंत्री.... फिर सत्ता की मलाई, भत्ता, पेंशन रूआब। तू मेरे बने बनाए कैरीअर पर इस तरह पानी फेरने पर क्यों तूली है जानू....! तुझे अमीर बनना है ना, अपना सपना साकार करना है ना ! कल को तू भी नगरसेविका वगैरह बन जाएगी ना ! अब तू बता इस उम्र में मैं कोई और काम कर सकता है क्या। तू दसवी तक पढ़ेली और मैं बारहवीं तक। जिस नेता पर रेप का आरोप लगा है और जिस महिला ने आरोप लगाया है दोनों पोस्ट ग्रेज्यूएट है ना बाबा ! उनको सब समझता है। फिर भी ये बवाल मचेला है ! अब तू तो जानती है ना, जब मैं बड़ा नेता बन जाऊंगा तो खूब पैसा आएगा, तब कोई नया बिजनेस शुरू करूंगा। तुम उस कंपनी की सोल मालकिन होंगी। क्या बोलती तू ! तब हमारी इतने सालों की तपस्या सक्सेस हो जाएगी। ठीक है ना डार्लिंग ! इस तरह अपना मुड़ मत खराब कर। सार्वजनिक जीवन में यह सब होता रहता है। कई बार लोग दूसरे को बदनाम करने के लिए ऐसा षड़यंत्र करते हैं।‘

खैर लोबो की पत्नी किसी तरह शांत हो गई। इस मसले पर चुप रहने में ही मैने अपनी भलाई समझी। दोनों को चाय पिलाया और टीवी का चैनेल बदल दिया।

दूसरे चैनेल पर उसी पार्टी की एक महिला पदाधिकारी सफाई देते हुए कह रही थी कि पार्टी ने दोनों को निष्कासित कर दिया है, ये उनका व्यक्तिगत मामला है, हम कुछ नहीं कह सकते। महिला के बारे में पूछने पर उसने जवाब दिया कि यदि यह सच है, तो उस औरत को बीस साल बाद अब पता चला है कि उस पर रेप हुआ है ? क्या वह इतना नासमझ है ? प्रोफेसर है वह, और खाते–पीते घर की है, एक नॅशनल पार्टी की विभागीय अध्यक्ष है। पिछले बीस साल से शादी-शुदा मर्द के साथ मजा मार रही थी तब उसे पता नहीं चला कि उस पर रेप हो रहा है या कुछ और ? उस दौरान उसने मजा नहीं मारा क्या ? ऐसी औरतें कानून का लाभ उठाकर मरदों को ब्लॅकमेल करती हैं। ऐसी महिलाओं के कारण राजनीति में काम कर रहीं अन्य महिलाएं बदनाम हो रही हैं। आखिर हमारा भी घर-परिवार है, इस स्थिति का हमें घर में सामना करना पड़ता है। जिन गरीब और बेसहारा औरतों के संरक्षण के लिए यह कानून बनाया गया है, वे तो कानून से अभी कोसों दूर हैं । वे तो कानून के बारे में कुछ जानती तक नहीं । गांव-कस्बों में महिलाओं पर कितना अत्याचार होता है ! खैर, एक महिला होने के नाते ये मेरी अपनी व्यक्तिगत राय है। मगर हां इसका मतलब ये भी नहीं है कि वह नेता दूध का धुला है। उसकी भी गलती है। मगर ये सब अभी सिध्द होना बाकी है।

एक और चैनेल पर इसी विषय पर बहस गरम थी। चार मान्यवर लोग अपना–अपना पक्ष रख रहे थे। इनमें दो महिलाएं और दो पुरुष थे। चारो अलग–अलग पेशे से थे और अपना–अपना राग अलाप रहे थी । एक मान्यवर महिला जोर- शोर से कह रही थी कि लगभग हर क्षेत्र में महिलाओं के साथ शोषण किया जाता है, उन्हें ऐसा करने के लिए बाध्य किया जाता है। इसके जवाब में पुरुष वक्ता ने पूछा कि क्या इस तरह की महिलाएं पुरुषों का उपयोग आगे बढ़ने की सीढ़ी के रूप में नहीं करती ? वे जान बूझकर अपना दांव खेलती हैं। वे क्या कर रही हैं, क्यों कर रही हैं इसका उन्हें पूरा संज्ञान होता है। ये प्यार नहीं बल्कि एक तरह की सौदेबाजी होती है। क्या साफ सुथरे मार्ग पर चलनेवाली किसी महिला को कोई मज़बूर कर सकता है ? दूसरे पुरुष प्रवक्ता ने बात को आगे बढ़ाते हुए पुष्टि दी कि बिना दोनों के रजामंदी से ऐसा कुछ भी नहीं हो सकता। जब वो महिला जानती थी कि नेता शादी- शुदा और उम्रदराज़ है फिर किस मकसद से वह अपना इतने सालों से शोषण करवा रही थी। अगर वह प्यार था तो आज कानून की आड़ में इज्जत की धज्जियां क्यों उड़ाई जा रही हैं ? मरे ख्याल से इस कानून में बदलाव लाना बेहद जरूरी है। या फिर ऐसा प्रावधान होना चाहिए कि बात सिध्द ना होने पर महिला को कठोर दंड दिया जाना चाहिए। वरना इसी तरह कानून का दुरुपयोग होता रहेगा। महिलाओं पर अत्याचार के जितने भी मामले आज दर्ज़ हो रहे हैं, उसमें आधे से अधिक फर्ज़ी मामले होते हैं। मामला दर्ज़ होते ही पुरुष को तुरंत हवालात का रास्ता दिखाया जाता है। ये सरासर नाइंसाफ है। इस बात पर दूसरी महिला प्रक्क्ता प्रखर हो गई और देश भर में हो रहे रेप के केस गिनाने लगी। कई उदाहरण भी उसने दिए। खैर बहस का सिलसिला इसी तरह चलता रहा। दो दिनों तक मामला चॅनेलों पर गरमाता रहा। तीसरे दिन से इस पर परदा गिरा दिया गया। गलियारों में बहस तेज हो गई कि नेता ने उस महिला को मुआवज़े के तौर पर एक प्लैट और मोठी राशि दी तथा मामल रफा – दफा हो गया। महिला ने दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया इस शर्त पर कि अगले चुनाव में उसे टिकट दिया जाएगा। मगर इस नेता का राजनीतिक कैरीयर खराब हो गया। अपनी ही पार्टी में अब उसका कोई वज़ूद ही नहीं बचा था।


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