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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

साथ में हैं कौन

गायत्री द्विवेदी 'कोमल'

साथ में हैं कौन अपने देखिये। हाल हो बदहाल सपने देखिये।। जिंदगी की हर गली सूनी पड़ी । सामने नित नव मुसीबत जो खड़ी । नैन का नूतन पनीला गान हो । दर्द में डूबे हुए अरमान हो। खोजिये फिर हर्ष नपने देखिये। साथ में हैं कौन अपने देखिए।। पंथ है अवरुद्ध बोझिल पाँव भी । नित उजड़ता भावना का गाँँव भी । स्वार्थ काई आज रिश्तों में जमी । शुष्क होती नैन की जाये नमी । फिर पुराने धैर्य छपने देखिए। साथ में हैं कौन अपने देखिए।। अब दबे पग आ रही है कालिमा । हो रही धूमिल प्रभाती लालिमा । मन भयंकर युद्ध खुद से लड़ रहा । मौत का पंजा निरन्तर बढ़ रहा । पूर्ण होंगे खूब सपने देखिए । साथ में हैं कौन अपने देखिए।।

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