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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

दोहे

शिवेन्द्र मिश्र 'शिव'

जितना जिसको चाहिए, बस उतना उपयोग। लोग नमक सा आजकल, करते मुझे प्रयोग।1 दया प्रेम परस्वार्थ ही, जीवन का श्रृंगार।। शांति और सौहार्द का संकल्पित व्यवहार।।2 काम क्रोध मद लोभ हैं, सब मानवी विकार। चार दिनों की जिंदगी, सबसे कर लो प्यार।।3 इतनी सी विनती प्रभू, करना बस स्वीकार। अन्त समय तन में कोई, आये नही विकार।।4 एक आपका आसरा, सिर्फ़ कामतानाथ। किसी परिस्थिति में कभी,नहीं छोड़ना साथ।।5

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