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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 76, जनवरी(प्रथम), 2020

भोजपुरी गजलें

विद्या शंकर विद्यार्थी

(1) चली ना अब चलावा परे पहरा आ गइल तम के कारा तूर के भिनसहरा आ गइल चिट्ठी कुल्ही जरा दिहल गइल बिटोर के विकास के गति में पढ़े ककहरा आ गइल पतझर से बात चल गइल मधुमास आवता खेत में सरसो फूल गइल लहरा आ गइल कमी के पीर आँखी में अब नीर ना बन सके गाँव के माटी से चलके केहू बहरा आ गइल बाँटे के बात बा तऽ बँटा लिहीं सहजोग के का केहू सताई अब अनुभव गहरा आ गइल (2) कइसे भीड़ में प्यार करीं हम पत्थर खाईं कि मार, सोचे के भइल बा कइसे भीड़ में इजहार करीं हम चोट देला सनसार, सोचे के भइल बा लसरा जाला भीड़ में अदिमी भीड़ में होला उपहास, भीड़ में हंगामा होला कइसे भीड़ में बात करीं हम आ मानीं बात तोहार, सोचे के भइल बा ना बिचार कबो भीड़ करेला खटकल करे प्यार, समझ भीड़ के ना होला कइसे भीड़ में बाँह धरीं हम लोगवा बाटे जानमार, सोचे के भइल बा फूल में कहँवा वासना बाटे फूल तऽ हउए पेयार, वासना प भीड़ जाला कइसे भीड़ से बात करीं हम भीड़ में बा फुफकार, सोचे के भइल बा स्वतः प्यार उपजेला दिल में आ प्यार हउए उपहार, भीड़ पतिआला ना चलऽ भीड़ से किनार चलीं हम नदी के ओह पार, सोचे के भइल बा।

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