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वर्ष: 3, अंक 55, फरवरी(द्वितीय) , 2019



मुझे सम्मान देने के लिए जब
बार बार पुकारते रहे जार्ज


डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट


पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस आखिरकार चले ही गए।उनका लंबी बीमारी के बाद दिल्ली में निधन हो गया, वे अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित थे ।वह 88 वर्ष के थे लेकिन याददास्त चले जाने के कारण बस जीभर रहे थे। जार्ज साहब से मेरे साथ एक ऐसी यादगार जुड़ी है,जो भुलाये नही भूलती।

बात उन दिनों की है जब वे भारत के रक्षा मंत्री थे और एक पत्रकार संगठन के कार्यक्रम में रुड़की आये थे।मैं एक राष्ट्रीय हिंदी दैनिक का संवाददाता होने के नाते उनके उस कार्यक्रम की कवरेज करने गया था।वहां अचानक आयोजक ने मुझे सम्मानित करने के लिए मेरा नाम लिया और मुझे मंच पर आमंत्रित किया।मुझे बहुत अटपटा लगा क्योंकि मुझे सम्मान दिए जाने की पहले से कोई सूचना नही थी,इसकारण मैने सम्मान लेने से मना कर दिया।यह देखकर स्वयं जार्ज फर्नाडिस ने मुझे मेरा नाम लेकर सम्मान देने के लिए बुलाया और जब मैं नही गया तो उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा मंत्री आपसे रिक्वेस्ट कर रहा है आप आइए, मैने उनसे निवेदन किया कि मैं तो यहां केवल कवरेज के लिए आया हूँ।मुझे किस बात के लिए सम्मान देना चाहते है पहले यह तो बताये ओर इस प्रकार मैने रक्षा मंत्री के आग्रह को भी नही माना।बाद में रक्षा मंत्री एक पैथोलॉजी लेब का उदघाटन करने गये।मैं वहां भी उन्हें मिला तो जार्ज साहब ने मुझे बुलाया और अपने पास बैठा कर बोले,मुझे अच्छा लगा जो तुमने बिना वजह दिये जा रहे सम्मान को नही लिया।लेकिन मेरे जीवन मे तुम पहले ऐसे पत्रकार आये हो जो सिद्धान्तों के लिए जीता हो।उन्होंने न सिर्फ मेरी पीठ थपथपाई बल्कि मुझे अलग से साक्षात्कार भी दिया।जार्ज फर्नाडीस ने बेहतरीन लीडरशिप का प्रतिनिधत्व किया। वह बेबाक और निर्भिक थे। उन्होंने देश के लिए अमूल्य योगदान दिया। वह गरीबों की सबसे मजबूत आवाज थे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रहे फर्नांडिस ने सेना के लिए कई बेहतरीन कदम उठाए थे। उन्होंने रक्षा मंत्रालय, उद्योग मंत्रालय जैसे कई अहम विभाग संभाले थे।

विद्रोह, विवाद और सफलता से सजी जिंदगी की इबारतआपातकाल में गिरफ्तारी से बचने के लिए बन गए थे सिखजेल से जीते थे चुनाव, जीवन में संभाले 3 मंत्रालय तीन जून 1930 को कर्नाटक में जन्मे जॉर्ज भाषाओं के जानकार थे। वह हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तुलु, कोंकणी और लैटिन भाषा जानते थे। उनकी मां किंग जॉर्ज फिफ्थ की बड़ी प्रशंसक थीं। उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रखा था।

ईमर्जेंसी के दौरान गिरफ्तारी से बचने के लिए जार्ज फर्नांडिस को पगड़ी पहन और दाढ़ी रख कर सिख का भेष धारण किया था जबकि गिरफ्तारी के बाद तिहाड़ जेल में कैदियों को गीता के श्लोक सुनाते थे। 1974 की रेल हड़ताल के बाद वह कद्दावर नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने बेबाकी के साथ इमर्जेंसी लगाए जाने का विरोध किया था।

इमर्जेंसी खत्म होने के बाद फर्नांडिस ने 1977 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए ही मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से लड़े और रेकॉर्ड मतों से जीत हासिल की। जनता पार्टी की सरकार में वह उद्योग मंत्री बनाए गए थे। बाद में जनता पार्टी टूटी, फर्नांडिस ने अपनी पार्टी समता पार्टी बनाई और बीजेपी का समर्थन किया। फर्नांडिस ने अपने राजनीतिक जीवन में कुल तीन मंत्रालयों का कार्यभार संभाला जिनमे उद्योग, रेल और रक्षा मंत्रालय शामिल रहे।जार्ज का जाना राजनीति के एक युग का अंत ही कहा जायेगा।


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