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वर्ष: 3, अंक 55, फरवरी(द्वितीय) , 2019



वेलन्टाइन डे विशेष
आधुनिक प्रेम की ज्वाला में सुलग रही जिन्दगी


पारसमणि अग्रवाल


फरवरी माह के दस्तक देते ही प्रेमरोगियों के सिर प्रेम का भूत सिर पर सवार हो जाता है। चॉकलेट डे, हग डे, रोज डे, प्रपोज डे जैसी कई सीढ़ियों के गुजर जाने के बाद इस प्रेम पर्व की अन्तिम मंजिल आती है वेलन्टाइन डे। आधुनिक वातावरण में प्रेम रोगियों की संख्या में दिन-दुगनी, रात चौगनी बढ़ोत्तरी होने से वेलन्टाइन डे युवा पीढ़ी के बीच अपनी गहरी पैठ बनाकर खुद को प्रेम पर्व के रूप में मान्यता प्रदान कराने की भरसक प्रयासों के सफलता का ताना-बाना बुनने में लगा है। पश्चात् संस्कृति के वेलन्टाइन डे जैसे रिवाज के मकड़जाल में फंसी तमाम जिन्दगियां तबाह हो चुकी है वही कई जिन्दगियां तबाह होने के लिये दस्तक दे चुकी है।

फैशन और ग्लैमर की चकाचौंध किशोरावस्था से युवावस्था की दहलीज की ओर कदम बढ़ा चुकी पीढ़ी पर इस कदर हावी है कि वह बिना लाभ और हानि के परिणाम किये बिना इस रोग के रोगी होने का खुशी-खुशी निमंत्रण स्वीकार कर रहे है और जो इन सब से बचना चाहता है उसे उसके कोंचिग,महाविद्यालय एवं अन्य जगहों का माहौल इसमें विलुप्त होने के लिये बाध्य करता प्रतीत हो रहा है। कहा जाता है कि प्यार दिल से होता है दिमाग से नहीं। लेकिन सूझ-बूझ एवं समझ पर दिल को इतना हावी होने दिया जाना भी कोई समझदारी नहीं है जो आपके साथ-साथ आपके अपनों को मुश्किलों से जूझने पर मुश्किल करें।

पाश्चात्य संस्कृति के वेलन्टाइन डे नामक इस उत्पाद के प्रभाव में लिप्त उपभोक्ता अन्य उपभोक्ताओं को जो अभी तक इस उत्पाद से वंचित है इस ओर आकर्षण और मजबूर करने में काफी सरलतापूर्वक सफलता हासिल कर एक नया पश्चात् संस्कृति का कीर्तिमान रचने में जुटे हुये है गर्लफ्रेण्ड एवं बॉयफ्रेण्ड होने की जिज्ञासा युवा साथियों में इस कदर रहती है कि वह अपने साथी से ओर कुछ पूछना भूले या न भूले लेकिन यह पूछना नहीं भूलते कि भाई कोई गर्लफ्रेण्ड बगैरह है या नही ? हमारी भाभीजी मिली या नहीं? कोई बाबु मिला कि नहीं ? इस तरीके के सवाल युवा पीढ़ी के बीच गेहद ही आरामजनक तरीके से सुनने को मिल जायेंगे।

घड़ी की टिक-टिक करती सुई एवं वक्त की बढ़ती रफ्तार के साथ-साथ अपने साथी के पास गर्लफ्रेण्ड या बॉय फ्रेण्ड है इस बात को जानने की लालशा से जन्म ले सवालों ने भी अपना रूप विस्तृत कर लिया अब अधिकतर युवा पीढ़ी के बीच से इस तरीके प्रश्न आपके कानों तक जरूर पहुचते होगें कि क्यों भाई कितनी गर्लफ्रेण्ड बनाये रखे हो? , अरेरेरे.....रे अब बता भी दो बहिन कि इस अनार पर कितने बीमार है ? कितनों के दिल को बहला रखा है?

अक्सर समाचार पत्र-पत्रिकाओं के पेज इस प्रकरण से रंगे मिल जाते है कि प्रेमिका की शादी होने पर प्रेमी ने खाया जहर, प्रेमी-प्रेमिका ने फॉसी पर झूल दी जान, प्रेमी युगल ने पटरी पर कूदकर गवाई जान । इस तरह की घटनाओं से न जाने कितने घरों का चिराग बुझ रहा है न जाने कितनी मॉ के ऑचल सूने हो रहे है । इसके अलावा प्रेम के इस दल-दल में फंसकर कुछ जिन्दगियां अप्रत्यक्ष रूप से अपनी जिन्दगी तबाह करने पर तुली हुई है मैं ये नहीं कहता कि प्रेम न करो, प्रेम सदियों से होता आ रहा है और सदियों तक होता जायेगा। लेकिन सही वक्त पर सही काम किया जाये तो परिणाम सकारात्मक आते न कि किसी के बहकावे में आकर या आस-पड़ोस के माहौल के असर में रंगकर खुद को स्मार्ट साबित करने की होड़ में प्रेमजाल में फंसकर अपनी जिन्दगी बर्बाद करना समझदारी है। सही वक्त और सही हालात पर किया गया प्यार आपके लिये वरदान भी साबित हो सकता है और दशा और दिशाहीन तरीके से किया गया प्यार जानलेवा होने के साथ -साथ बेहद खतरनाक भी हो सकता है फैसला आपके हाथ में प्रेमजाल में फंसकर खुद की जिन्दगी को तबाह करना है या फिर अपनों की कसौटी पर खरा उतरकर उन्हें गर्व करने का अवसर प्रदान करना है।


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