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वर्ष: 2, अंक 31, फरवरी(द्वितीय), 2018



तरही गज़ल


रवि रश्मि 'अनुभूति '


   
तरही मिसरा - 
 
  " हरेक पल क्यों मेरा इम्तिहान जैसा है "

अरकान - मुफ़ाइलुन फ़इलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन वज़्न - 1212 1122 1212 22
इस बह्र पर आधारित गीत - " कभी - कभी मेरे दिल में ख़्याल आता है "
हरेक पल क्यों मेरा इम्तिहान जैसा है ..... जग मेरा तो , खुले आसमां जैसा है ..... फ़कीर है अब दिल तो , कहाँ नसीबा है ..... वेश मेरा ये किन्तु , महान जैसा है ..... लिखा नहीं सितारे , बुलंद नहीं होंगे ..... ख़याल मेरा दिलक़श , ग़ुमान जैसा है ..... फाके पड़े तो जाना , भूख है क्या चीज़ ...... भरता हुआ पेट , सायबान जैसा है ..... छोड़ता नहीं आस पर , ज़िंदा रहना है ...... यह मुद्दा इश्क़ चढ़ा , परवान जैसा है ..... इश्क़ तो पगलिया , दीवाना करता है ..... लगे यही अभी तो , शैतान जैसा है ..... 'रश्मि' इश्क़ की अब, आज़माइश छोड़ो ..... इश्क़ मेरा ये , भव्य मकान जैसा है ..... *******

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