Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 2, अंक 31, फरवरी(द्वितीय), 2018



हिन्दूस्तान के बेटे


नरेश गुर्जर



थर थर कैसे कांपे है देखो दुश्मन के कलेजे,
सरहद पर गूंज करने निकले जब हिन्दूस्तान के बेटे,
ना गोला बारूद ना कोई टैंक से डरते
लेकर चलते है अपने कंधों पर जीत के जज्बे,
ना पीठ दिखाई कभी ना पीठ पे कभी वार किया
जब जब चली सामने से गोली तो उसका करारा जवाब दिया,
चुन चुनकर दुश्मन के सीने में फिर अपना खंजर उतार दिया,
भारत माता के वीर जवानों ने सारे जहान में ऊँचा अपने वतन का नाम किया,
 इनकी कुर्बानी को भूलें ना जग
चलो ऐसा हम कुछ काम करें 
भरकर हृदय को करूणा से
हाथ जोड़कर आओ नरेश इनको प्रणाम करें

 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें