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वर्ष: 2, अंक 31, फरवरी(द्वितीय), 2018



नारी तो नारी है


डॉ. अश्वनी कुमार वर्मा


  

नारी को तुम छोटा ना आँको 
नारी तो बस नारी है।
सभी काल में आज तक
नारी शक्ति की आधिकारी है
जिसने हर परिस्थिति
कठिन समय में भी
कंधे से कंधा मिला
कदम से कदम बड़ाकर
दिया पुरुषों का साथ है।
फिर भी पुरुषप्रधान
केइस देश में न्याय
कभी न मिल सका
और न ही मिलता
नारी को मान और सम्मान है
नारी तो बस नारी है।
वो ही सृस्टि स्वरूपा है
जगत की पालनहार है
वही लक्ष्मी, वही सरस्वती
वही काली, दुर्गा है
उसमे मां की ममता
वात्सल्य स्नेह
सच्चे मन का प्यार है।
बच्चों से लेकर बूढ़ों तक
सभी को सँवारती है
यह नारी जगत की पालनहार ह।ै 
कभी सास तो कभी बहू
कभी बेटी तो कभी माँ
बनकर हर उम्मीद पर
खरी उतरती है ।
यही उसकी उदारता स्नेह
निज स्वतन्त्रता में बाधक है
नारी तो बस नारी है
उसकी महिमा अपरम्पार है
जो समझ गया 
वह इस दुनिया से मानो तर गया
नारी हमेशा सम्मान की अधिकारी है
वह अब नही बेचारी है
उसे भी उड़ने दो 
उसका भी अधिकार है
गगन में अपनी स्वतंत्रता का 
परचम लहराने दो
और फिर देखो
नारी का असली रूप
जो कभी दुर्गा,
तो कभी लक्ष्मीबाई 
तो कभी चामुंडा
का रूप दिखाकर
जग के पापियों को
सद्मार्ग न्याय का उचित
रास्ता दिखलाती है 
जग की पालनहारी है
नारी तो बस नारी है।
 

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