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वर्ष: 2, अंक 31, फरवरी(द्वितीय), 2018



सारा रस निचोड़ लो!


डॉ० अनिल चड्डा


 
थोड़ी सी
रिश्तों पर गर्द 
बैठ जाये तो
मुस्करा कर 
पोंछ दो
कभी किसी पर
प्यार आ जाये तो
सभी कुछ 
झोंक दो
जाने किस-किस 
गली से
गुजर जाती है
जिंदगी
कहीं कोई
अपना मिल जाये तो
कदमों को रोक लो
लगता तो है
बहुत छोटी है जिंदगी
सोचने बैठो तो
समझ आता नहीं
किस सोच को 
पकड़ लो 
कौन सी सोच को
छोड़ दो
कोई पल कड़वा था
तो कोई मीठा
इन कड़वे-मीठे पलों संग
जीवन जी लो
सारा रस निचोड़ लो!
		 
 

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