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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

क्या दिल बिकते हैं

डॉ० अनिल चड्डा

अपने अलावा क्यों सब खुश दिखते हैं, उनके जहां में क्या दिल बिकते हैं। न कोई चाह रहे, न कोई आह निकले, ऐसे शख्स कहो कहाँ मिलते हैं। चोट मिलती है सभी को कभी न कभी, पर जख्म तो किसी-किसी के रिसते हैं। अपने हाथ में कहाँ शिद्दत से प्यार मिलना, फूल सभी जगह तो नहीं खिलते हैं। हम तो बैठे ही रहे किसी के इंतजार में, वो और हैं जो हरदम साथ चलते हैं।

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