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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

मत पूछो...

विश्वम्भर पाण्डेय 'व्यग्र'

बार-बार हमसे सवाल मत पूछो समुद्र में आता क्यूँ उबाल मत पूछो क्यूँ भटकते जवानी में अक्सर लोग ऐसे आप हमसे बवाल मत पूछो दे देते जान अपनी दूसरों के खातिर क्यूँ कर होता ऐसा कमाल मत पूछो झूठ-सच की लड़ाई में इस वक़्त कौन होगा अब हलाल मत पूछो हम तो व्यग्र हैं गम साथी अपना हमसे खुशियों के ताल मत पूछो

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