मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

एक मुलाकात जरूरी है सनम

रौली मिश्रा

न जाने कब मिले थे हम उस वक्त सांसे गयी थी थम अफसोस मे रहा आज वो मन न जाने कब वो मुलाकात होगी इस लिए एक मुलाकात जरूरी है सनम।। वक्त निकलता जा रहा हर रोज ये सोचते सोचते न जाने कब मुलाकात होगी ये सोचते सोचते अभी तुमसे दूर जाने से नही भरा है मन इस लिए एक मुलाकात जरूरी है सनम।। सांस लेने से आपकी याद आती है उस वक्त ये सांसे महक जाती हैं आपको देखने के लिए ये आंखे तरस जाती है न जाने कब वक्त के साथ वो यादे मिट जाए उन यादो को मिटाने का नही है मन इस लिए एक मुलाकात जरूरी है सनम।।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें