मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

मेरे देश की आवाज़

ज्योति स्वामी “रोशनी”

आज दिल की अपने बात कहने दे तू मुझे सफेद रहने दे ना रंग धर्म का दे, ना जात का ना बेमानी का, ना गुनाह का ना हरा, ना नीला, ना केसरिया क्या रंग होगा इन्साफ का? साफ बहने दे पानी, साफ खेत रहने दे। ऐ हिंदुस्तानी, मुझे सफेद रहने दे। हर हिस्सा मुझे प्यारा, मैं भारत हूँ । हर रंग हो जिसमें, वो इबारत हूँ । मत कर मेरे जिस्मो-रूह के टुकड़े, हर बोली-भाषा में रची कहावत हूँ । सुकून हज़म होता बस, झगड़ो से परहेज़ रहने दे । हर हिन्दुस्तानी मुझे सफेद रहने दे । ना बुरके से श्रिंगार, ना साङी , ना सिन्दूर का रंग डार। सफेद पर सब रंग दिखते, बस “धब्बे और दाग़”। अपने-अपने तरीके से सजाने को ना लङ, बस हर-एक रहने दे । हर हिन्दुस्तानी मुझे सफेद रहने दे । आज दिल की अपने बात कहने दे , तू मुझे सफेद रहने दे ।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें