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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

मत पीओ दारू ताड़ी

जनकदेव जनक

मत पीओ दारू ताड़ी जिंदगी देगा बिगाड़ बिक जायेगी खेती बाड़ी नहीं मिलेगा कोई जहान, मत पीओ दारू ताड़ी …. भोर का गया रात में आया मेहरी को दिया गाली बेसुमार रास्ता चलने का सहुर नहीं बोलो, कैसे होगा बेरा पार , मत पीओ दारू ताड़ी …. नोकरी चाकरी कहीं देखो, तोड़ दो भट्ठी से नाता अपने मन पर काबू धरो नहीं तो बैठ जायेगा भट्ठा, मत पीओ दारू ताड़ी …. बाल गोपाल का मुंह देखो घर में रखो घरवाली का मान दे दो आहुति अपने आदतों का, बदल जायेगा सारा जहान , मत पीओ दारू ताड़ी ….


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