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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

कर्नाटक भूमि

डॉ अंबूजा एन मलखेडकर ' सुवना '

ऋषि मुनि साधु संतों बलिदानों की धरती है, कर्नाटक की भूमि कला- संगीत, नृत्य, संस्कृति की अद्भुत ,पुण्य अवनी है। यहां कृष्णा,भीमा,शरावती, तुंगा ,काली,कावेरी नदियां, झरने, जोग दूध सी निर्मल जल की ढेरी हैं । कितनी मोहक कितनी सुंदर वास्तुकला चमकी है, हम्पी, बेलूर,हलेबीड़ू, पट्टदकल्लु जैसी छटा यहाँ बिखरी है। अद्भुत ,अनुपम वन्यजीव अभ्यारण्य निधि है इसकी हरियाली करती आकर्षित है लाल,काली मिट्टी इसकी रागी, ज्वार, तुअर, चावल कृषि की प्रमुख फसले हैं। मातृ भाषा कन्नड़ है इसकी ज्ञान, ध्यान ,साहित्य.पलते हैं देश विदेशों के लोगों से इसकी शोभा लगे भारी, धन्य- धन्य कर्नाटक भूमि हम सब इस पर वारी।


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