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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

सरस्वती वंदना

आलोक कौशिक

हम मानुष जड़मति तू मां हमारी भारती आशीष से अपने प्रज्ञा संतति का संवारती तिमिर अज्ञान का दूर करो मां वागीश्वरी आत्मा संगीत की निहित तुझमें रागेश्वरी वाणी तू ही तू ही चक्षु मां वीणा-पुस्तक-धारिणी तू ही चित्त बुद्धि तू ही कृपा करो जगतारिणी विराजो जिह्वा पे धात्री हे देवी श्वेतपद्मासना क्षमा करो अपराधों को स्वीकार करो उपासना

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