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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

जीवन इसका नाम
( सरसी छंद)

महेन्द्र देवांगन माटी

जीवन को तुम जीना सीखो , किस्मत को मत कोस । खुद बढकर तुम आगे आओ , और दिलाओ जोश ।। सुख दुख दोनों रहते जीवन , हिम्मत कभी न हार । आगे आओ अपने दम पर , होगी जय जयकार ।। सिक्के के दो पहलू होते , सुख दुख दोनों साथ । कभी गमों के आँसू बहते , कभी खुशी हैं हाथ ।। राह कठिन पर आगे बढ़ जा , मंजिल मिले जरूर । वापस कभी न होना साथी , होकर के मजबूर ।। अर्जुन जैसे लक्ष्य साध लो , बन जायेगा काम । हार न मानो कभी राह में , जीवन इसका नाम ।। जीवन एक गणित है प्यारे , आड़े तिरछे खेल । गुणा भाग से काम निकलता , होता है तब मेल ।। हँसकर के अब जीना सीखो , छोड़ो रहना मौन । माटी का जीवन है प्यारे , यहाँ रहेगा कौन ?

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