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Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

भोजपुरी गजलें

विद्या शंकर विद्यार्थी

1. गनीमत बाटे कि जागल लोग नइखे रावा लागल बानीं लागल लोग नइखे कटहिया बनी कहियो राउर चाल्हांकी समझ लिहीं सभे पागल लोग नइखे कहियो हवा एक दिन उठा दिही पर्दा चुप्पी बाटे सधले भागल लोग नइखे जब तलक सहत बा रउरा बाटे चानी घेरा तूर घालेके उत्साहल लोग नइखे आधा आबादी अबहीं निंद में बा विद्या जुआ जुआठ बाटे नाधल लोग नइखे । 2. सेजरिया से काहे परा जाला केहू नजरिया से काहे बिसरा जाला केहू नेहिया में धोखा होई एह से बड़ का बिस्तर पर चिट्ठी गिरा जाला केहू लागेला हियरा से हरस ना ओराई बाकि हियरा के बिहरा जाला केहू अइसन समइया में बेयरिया बा बैरी दरकल करेजवा पीरा जाला केहू जेही घुँघटवा उघारी रूप निरखल सोची बिजुरिया गिरा जाला केहू ।

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