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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 4, अंक 78, फरवरी(प्रथम), 2020

नन्ही चिड़िया

लीला तिवानी

नन्ही-सी मैं चिड़िया हूं, अपनी ममा की गुड़िया हूं, लगती हूं मैं भोली-सी, बड़ी गजब की पुड़िया हूं. अभी तलक मैं उड़ नहीं पाती, फुदक-फुदक कर चलती हूं, जब उड़ने की बारी आए, देखूं कहां निकलती हूं. ममा ही मेरी टीचर भी है, बहुत-से पाठ पढ़ाती है, अपने देश से प्यार करने का, प्यारा सबक सिखाती है.


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