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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



बाधाएं अनेक हैं


गुर्जर विक्रमसिंह


  
जिंदगी की राहों में बाधाएं अनेक हैं 
राही तुझे चलना है चलते ही रहना है 

संघर्षों की आंच में हर पल यहां तपना है 
जीवन है एक पहेली और व्यथाएं बहुत हैं

हर पल यहां आयेंगे तुफान दुःखो के 
और अपने ही बनेंगे राह में अडचन तेरी 

बाधाओं से डरकर हार नहीं मानूंगा 
चलता हूं अविचल और चलता ही रहूंगा 

भय मुझे टोकेगा तकलींफे रोकेंगी 
पर मुझे संघर्षो से मंजिल यहां मिलेगी 

काटों भरी दुनिया में पग पग पर यहां तुझे 
इससे भी लडना है उससे भी लडना है 

मंजिल पर तेरी सदा अपने ही तेरे यहां 
अचडने पैदा करते हैं करेंगे 

अंधेरोंं को चीरकर मंजिल को पाना है 
मुशकिंलो को करके पार उस ओर जाना है 

मंजिल भी मिलेगी मेहनत से तुझे अपनी 
फिर भी तुझे यहां ना रुकना ना झुकना है 

जिंदगी की राहों में ........

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