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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



रोटी का धर्म बता दो


सलिल सरोज


 
अगर भूख कौम के रास्ते आती है
तो रोटी का भी कोई धर्म बता दो

आप धनाढ्य हैं,आप बच जाएँगे
खेतिहरों का भी कोई साल नर्म बता दो

दिल्ली की बाँहों में हैं सब रंगीन रातें
किसी मल्हारिन का भी चूल्हा गर्म बता दो 

मन्दिर जाने से ही पाप-पुण्य होता है क्या
फिर आधुनिक बाबाओं का भी कर्म बता दो

कविताएँ जो कह पाती सब की बातें
तो तहखानों में कैद ज्ञान का मर्म बता दो

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