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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



मेरा गाँव


महेन्द्र देवांगन माटी


          
मेरा गाँव है बड़ा सुहाना, 
पीपल का है छाँव पुराना।
जिसमें बैठे दादा काका, 
ताऊ भैया और बाबा ।।
तरह तरह की बात बताते, 
नया नया किस्सा सुनाते ।
कभी नही वे लड़ते झगड़ते, 
आपस में सब मिलकर रहते ।।
सुख दुख में सब देते साथ,
देते हैं हाथों में हाथ ।
चारों ओर है खुशियाँ छाई, 
हिन्दू मुस्लिम भाई भाई ।।
तीज त्योहार मिलकर मनाते,
आपस में हैं गले मिलाते ।
स्वच्छ सुंदर मेरा गाँव, 
चारों ओर हैं पेड़ों की छांव ।।
 

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