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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



बापू के बंदर


कंचन अपराजिता


          
बापू ,तेरे तीन बंदर आज भी दिख जाते है।
पहले कुछ खास जगह अब हर जगह नजर आते है।
मिजारू बंदर ,जो आँखे बंद किये बैठा है।
कहता है बुरा मत देखो तो मनुष्य हादसे,
भीख माँगते बच्चे ,नही देखता बस गुजर जाता है।
किकाजारू बंदर,जो कहता है बुरा मत सुनो।
तो मनुज अस्मत खोती बच्ची की चीख,
सच्चाई,अंतरात्मा की आवाज नही सुन पाता है।
इवाजारू बंदर,जो मुँह बंद किये बैठा है।
आज मानव तो चुप ही है ,बस पैसा बोलता है।
जो चाहे करवा ,लो मनवा लो ,कहला लो।
गांधीजी ,सभ्यता के विकास के साथ साथ
आपके तीन बंदर ,बंदर से आदमी बन गये।
आपके जो बतलाये अर्थ बस वो अनर्थ कर गये।
 

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