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वर्ष: 3, अंक 54, फरवरी(प्रथम) , 2019



सरस्वती


नवीन कुमार भट्ट


 
जय-जय माता सरस्वती,रखना मेरी लाज।
हर कंठों की वासिनी,दे मधुरिम आवाज।।

सारे जग को है दिये,तुमनें ये उपहार।
विद्या माता सरस्वती,भरा ज्ञान भंडार।।

हर धड़कन में सरस्वती,करे बैठ के वास।
दिल में गर विश्वास है,हो जाती हर आस।।

नमन सदा तुझको करूँ,तू देती है ज्ञान।
जिसके कारण ही मिले,हो आदर सम्मान।।

विना ज्ञान कुछ भी नहीं,मान लीजिए बात।
नमन नीर माँ सरस्वती, देनी होगी दात।।

विद्या देती सरस्वती,करती पालनहार।
ज्ञान रूप भंडार का,तू देती उपहार।।
  

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