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वर्ष: 2, अंक 30, फरवरी(प्रथम), 2018



कड़ी है धूप


यूसुफ़ रईस


                    

कड़ी है  धूप चलो  सायबान हो जाओ
ज़मीन छोड़ के तुम आसमान हो जाओ।

किसी ने पूछा अगर तो जवाब क्या दूंगा 
तुम्हीं ज़ुबाँ से मेरी ख़ुद बयान हो जाओ।

किसी का अक्स निगाहों में उतर आयेगा 
अगरचे  आप मेरे दरमियान हो जाओ।

वजूद मेरा  तलाशेगी एक दिन  दुनिया
अगर  जो आप मेरी  दास्तान हो जाओ।

ये मसअले तो कभी हमसे हल नहीं होंगे 
ख़ुदारा आप मेरे हम-ज़बान हो जाओ।

हक़ीर मुझको समझते हैं ये जहां वाले 
तुम्हीं हयात का मेरी  गुमान हो जाओ।

तुम्हारे दरम्यां कुल कायनात आयेगी 
तुम एक बार को ऊंची उड़ान हो जाओ।
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