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वर्ष: 3, अंक 51, दिसम्बर(द्वितीय) , 2018



ख़्वाब तुम देखना ....


सुशील यादव दुर्ग


   
आज की खबर, अखबार तो पढ़ो
मुल्क ये कितना, बीमार तो पढ़ो

गोकशी, नाम ले लड़ मरो सभी
बिखरे,जो सरहद औजार तो पढ़ो
 
इल्म है अगर, मिटता वजूद ही
रहनुमाओ!  तरफदार तो पढ़ो

किस हिफाजत सियासत सँवारते
किस गली-चौक, बाजार तो पढ़ो

ख़्वाब तुम देखना आम-आदमी
वोट के ख़ास इश्तिहार तो पढ़ो

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