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वर्ष: 3, अंक 51,दिसम्बर(द्वितीय)  , 2018



मर्द


डॉ विजेंद्र प्रताप सिंह


सर्दियों की एक शाम झुटपुटे में विशेष पद्धति से बजती हुई तालियां बजाते हुए आपस में गुफ्तगू करते हुए चार हिजड़े अपने डेरे की ओर लौट रहे थे। झाड़ियों से घुटी घुटी से चीख सुनाई दी चारों ने देखा दो दरिंदे एक कमसिन लड़की को नौच रहे थे भूखे भेडियों से भी ज्यादा निर्दयता से। हिजड़े बचाने पहुंचे तो एक ने गाली देते हुए कहा "साले छक्को भागो यहां से, ये मर्दों का काम है। तुम हुजडों का क्या काम।" इतना सुन हिजड़ों के हिम्मत दिखाते हुए दोनों को पकड़ लिया। जिस लड़की को वे कुत्ते अब तक नोच रहे थे, उसने गजब की फुर्ती से वही चाकू उठाया, जिसकी नोक पर रखकर वे उसे सड़क से नीचे ले आये थे, और एक ही बार ने लड़कों के योनानांग काट डाले और भाग गयी। एक हिजड़े ने कहा चलो अच्छा हुआ, अब तुम भी हमारी तरह मर्द हो गए। जो इज़्ज़त लूटते नहीं बचाते हैं ।


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