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वर्ष: 3, अंक 51, दिसम्बर(द्वितीय) , 2018



हूक


पुनीता जैन


    
धर्म जाति आदिवासियत
या लैेिंगकताओं ही से
नहीं तैयार होते हाशिए

इस पृथ्वी पर 
कई देश हैं हाशिए/ गरीबी की धुरी पर 
देश के कई कोने /समाज /मोहल्ले 
कोने के कई परिवार 

हर परिवार में अवलेहित /उपेक्षित 
अवांछित कोई कोना 
कोने अंतरे में उपस्थित एक कोना 
हाषिए की नोंक पर टिका 
खुद को बचाता जो 
हर तरह संभालता 
ठोकरे खाता 
मारा जाता 
बेचैनियों से अपनी 

एक हाशिया  हर कहीं
जीने के लिए तड़पता /प्रश्न करता 
चीन्हे जाने की पुकार एक ...!
विकल सनातन

 

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