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वर्ष: 3, अंक 51, दिसम्बर(द्वितीय) , 2018



तुम सताते रहे


योगेन्द्र कुमार निषाद "योगी"


                     
 
जिंदगी में सनम......... तुम सताते रहे। 
रोज़ यादो मे आ........ तुम रिझाते रहे। 1
 
हर तरफ है तिरी ही..... निशानी सनम, 
देख उसको ही हम.... दिन बिताते रहे। 2

खा़ब आँखों मे महफिल सजी है सनम, 
नज्म तारिफ तिरी....... गुनगुनाते  रहे। 3

मस्त मौसम बना.... आशिकी की यहा, 
खूबसूरत हँसी.......... गुल लुभाते रहे। 4
 
वादियों में महक जो....... तिरी है बसी, 
बिन पिये ही सनम..... हम बहकते रहे। 5

बस वफ़ा-ए-मुरादे........ रखी है सनम, 
साथ तुम हम-सफर.... बन निभाते रहे। 6
 
गीत ग़ज़लों मे "योगी".......कहे जा रहा, 
मौसिकी प्यार....... दिल से बजाते रहें। 7

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