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वर्ष: 3, अंक 51, दिसम्बर(द्वितीय) , 2018



दादी जी


राजपाल गुलिया


  
दादी  जी  ओ  री   दादी  जी , 
कब  है  चाचू  की  शादी  जी .

किस दिन लगेगा शामियाना ,
 कब कितनी बनें मिठाई जी .
कब   बनेंगे    चाचू      दूल्हा ,
कब   गूँजेगी    शहनाई   जी .
लेनी  है  उस  दिन  की  छुट्टी ,
हो  अपनी  भी  आजादी  जी .   .........

मिहमानों  की  देखरेख  का ,
किसके सिर पर भार  रहेगा .
सोम मंगल हो भले उस दिन ,
पर   मेरा   रविवार     रहेगा .
खूब   रहेगा      धूमधड़ाका ,
बात   यही  सीधी  सादी जी .      ...........

रोहन   मोहन   पूछ  रहे    हैं ,
बोलो  कब  दावत  पर  आएं .
दुविधा  में   हैं  दादी  जी अब,
 डेट  कौन  सी   हम  बतलाएं .
चाचा   शहज़ादा   सा  लगता  ,
है  चाची   क्या  शहज़ादी  जी .      .............					
 

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