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वर्ष: 3, अंक 51, दिसम्बर(द्वितीय) , 2018



गुड़िया रानी


महेन्द्र देवांगन माटी


              
छमछम करती गुड़िया रानी,  खेले छपछप पानी ।
उछल कूद वह करती रहती,  डाँटे उसको नानी ।।

बस्ता लेकर जाती शाला , ए बी सी डी पढ़ती ।
कभी बनाती चित्र अनोखे,  कभी मूर्ति को गढ़ती ।।

साफ सफाई रखती अच्छी,  कचरा पास न फेंके ।
कूड़ा कर्कट आग लगाकर,  हाथ पैर को सेंके ।।

सबकी प्यारी गुड़िया रानी,  दिनभर शोर मचाती ।
खेलकूद में अव्वल रहती,  सबको नाच नचाती ।।                            

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